इसी स्थान पर सिकन्दर का वापसी स्थल?
इसी स्थान पर सिकन्दर का वापसी स्थल?nऐतिहासिक तोर पर प्रसिद्ध विश्व विजेता मकदूनिया के राजा सिकन्दर का इस मन्दिर के साथ समबन्ध जुडा हुआ है, जन श्रुतियो के अनुसार सिकन्दर इस देव स्थान से वापिस चला गया था वह दिग्विजय करता हुआ जब काठगढ पहुंचा तब उसकी सेना का उत्साह समाप्त हो गया और वह इसी स्थान से वापिस चला गया था, 326ई^पू ओहिनद के निकट नावों के पुल से सिन्धु नदी पार कर भारत पर आक्रमण किया उस समय पंजाब तथा अनेक छोटे-छोटे राज्य थे जो आपस में भावना रखते थे सिकन्दर का अन्तिम कैम्प व्यास नदी के किनारे लगा माना जाता है जो सम्भवत मीरथल के पास है व्यास नदी की ओर आगे बढते हुए सिकन्दर ने इस कम ऊंची पहाडियों को छुआ यूनानी आक्रमण का भारत विजय अभियान व्यास नदी के किनारे आकर ठण्डा पड गया कयोंकि यहाँ के लोगों की देश प्रेम तथा वीरता को देखकर उसके सैनिकों ने आगे बढने से इंकार कर दिया था,परिणामस्वरूप सिकन्दर को अपनी योजना को बदलना पडा nकहा जाता है कि उस समय विश्व विजेता सिकन्दर की सेनाओं का पड़ाव काठगढ मे ही था प्रात काल वह जब सो कर उठा तो गूढ विचारों मे खो गया था उसके मस्तिष्क में विचार आया जो मेरे बहादुर सैनिकों ने इतना विस्तरत विश्व जीतने पर इस स्थान पर आकर आगे बढ्ने से जो इंकार किया वह इस शिवलिंग की दैविक महानता के कारण हुआ इस लिए शिवलिंग के चारो ओर की जगह को समतल करके मोटी चारदीवारी बनवाई बैठने के लिये व्यास नदी की ओर चार दीवारी के कोनों पर अषटकोणीय चबूतरे बनाया ताकि यात्री यहाँ से प्राकर्तिक का नैसर्गिक का आनंद अनुभव कर सकें तथा यूनानी सभ्यता की छाप स्थापित की जावे ताकि आने वाली पीढ़ियों इस स्थान को सिकन्दर की वापसी स्थल के रूप में स्मरण करती रहें जोकि आज भी मौजूद है
